دُھوپ کڑی میں شجر جا نا تھا
ظُلمت ِشب میں فجر جانا تھا
بطور دنیا تُو نے برتا لیکن
کتنا تجھے ہٹ کر جا نا تھا
دشتِ غُربت میں نہ بارش چاہی
تیرا ساتھ مثلِ ابَر جا نا تھا
گلےِ نہیں پَھُپھولےِ پڑے لہجے سے
تیری باتیں مرھمِ جگر جا نا تھا
اسے قرار واقعی سزا ملنی تھی
دل نے تجھے چارہ گر جانا تھا
मुझे तेज धूप में पेड़ पर चढ़ना पड़ा
मुझे रात के अंधेरे में फजर जाना था
एक ऐसी दुनिया के रूप में जिसे आप भरते हैं लेकिन
आपको कैसे आगे बढ़ना था
रेगिस्तान में बारिश की कोई जरूरत नहीं है
मुझे बादल की तरह तुम्हारे साथ जाना था
न कि हश्र स्वर में
आपके शब्द जिगर को चंगा करने के लिए थे
वह वास्तव में दंडित होने के योग्य था
आपका दिल गिरने वाला था

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